December 11, 2019
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आश्चर्यजनक किन्तु सत्य: रेडियो का लाइसेंस

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लोग दिवाली की सफाई में लगते हैं और मैं कभी भी !! शायद ऐसा करना लिखा हुआ था क्योंकि अपनी इस आदत की वजह से आज मेरे हाथ एक ऐसी चीज़ लगी जिसे लेकर कुछ देर मैं बस यूं ही खड़ा रहा | उलट पलट के यादों के पन्ने को बहुत देर तक निहारने के बाद सोचा क्यों ना इसे लोगों तक पहुँचाया जाए | एक ऐसी बात जिसके बारे में हर कोई नहीं जानता, शायद बहुत कम लोग जानते हैं | आप सोच सकते हैं कि मेरे हाथ क्या लगा था ?  मेरे नाना का लाइसेंस…. और लाइसेंस भी कौन सा…सोचिये…पर आप सोचेंगे भी तो नतीजा शायद सिफ़र होगा | मैं रेडियो के लाइसेंस के बारे में बात कर रहा हूँ | आप चौंक गए होंगे, क्योंकि मैं तो कुछ देर के लिए बुत बन गया था |

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बिनाका संगीत माला ….. ये विविध भारती है …. जिन लोगों ने इन आवाज़ों को सुना है उनके दिमाग में एक ही विचार कौंधता है …. “रेडियो” या “ट्रांजिस्टर” | क्या दशक था वो !! 1920 के आसपास रेडियो प्रसारण भारत में शुरू हो गया था | आप ये जान कर चौंक जाएंगे कि उस समय रेडियो के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था और सालाना फीस 15 रूपये हुआ करती थी जो कि उस ज़माने के हिसाब से महंगा सौदा था | जैसे कि बन्दूक के लिए लाइसेंस चाहिए होता है, और वाहन के लिए भी ठीक वैसे ही रेडियो के लिए भी लाइसेंस ज़रूरी था | उस समय तो साइकिल के लिए भी लाइसेंस की ज़रूरत थी | बिना लाइसेंस के इन “महंगे शौकों” को पालना मुसीबत का काम था |

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रेडियो के बिना आसपास की दुनिया के बारे में जानना संभव नहीं था | रेडियो को बहुत संभाल के रखा जाता था, बिलकुल “safe-custody” की तरह | घर में बिजली और अन्य ज़रूरत की चीज़ें परखने के बाद ही कोई रेडियो का जानकार व्यक्ति घर में रेडियो “install” करने आता था | ये व्यक्ति रेडियो का एरियल install करता था, जो कि उस समय मछली के जाल जैसा हुआ करता था | इस एरियल के बिना रेडियो पर आवाज़ साफ़ नहीं आती थी , और इसे install करना हर किसी के बस की बात भी नहीं थी | बिजली का स्विच चालू करने के बाद रेडियो में जो knob होती थी उसे घुमा फिरा कर ट्यूनिंग की जाती थी | 4 तरह के band हुआ करते थे | एक Medium band होता था, बाकी Shortwave(SW)1, SW2 और SW3.

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उस समय रेडियो मैकेनिक होना गर्व की बात थी क्योंकि इससे आपकी शिक्षा का दर्जा दिखता था | अपना रेडियो खुद कैसे बनाया जा सकता है इसपर किताबें मिलती थी और जो अपना रेडियो बना लेते थे वो जीनियस की श्रेणी में आते थे |

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