राजस्थान की शान है – जोधपुर

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राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है जोधपुर | इसे “सन सिटी” और “ब्लू सिटी” कहा जाता है | “सन सिटी” इसलिए क्योंकि यहाँ पूरे साल सूरज की चमक बरक़रार रहती है | “ब्लू सिटी” इसलिए क्योंकि पुराने शहर में लगभग सभी घर नीले रंग में रंगे हुए हैं | 1459 में राठौड़ वंश के राव जोधा ने जोधपुर की स्थापना करी थी | राव जोधा मूलतः मंडोर के निवासी थे | मंडोर उस समय मारवाड़ की राजधानी हुआ करता था | फिर जोधपुर शहर बसा जो कि दिल्ली और गुजरात की सड़कों से सामरिक रूप से जुड़ा हुआ था | सामरिक महत्व ये था कि जोधपुर को इन राज्यों से अफीम,ताम्बा, रेशम,चन्दन, खजूर और कॉफ़ी के व्यापार से ख़ासा मुनाफ़ा होता था |

अंग्रजों के राज के समय जोधपुर क्षेत्रफल के हिसाब से राजपुताना का सबसे बड़ा इलाका था | उस समय शांन्ति और स्थायित्व कायम रखते हुए जोधपुर फलता फूलता रहा | यहाँ के “मारवाड़ी” व्यापारी समुदाय ने व्यापार के क्षेत्र में समूचे भारत में जोधपुर डंका बजा दिया | 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तब जोधपुर को केंद्र में विलय कर इसे राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर का दर्जा दिया गया |

जोधपुर का मौसम अक्सर गर्म रहता है | यहाँ बारिश जून से सितम्बर के मध्य होती है | तापमान अधिकतर 40 डिग्री को पार कर जाता है | यहाँ हलकी सी बारिश से तापमान में बहुत मामूली गिरावट के साथ बढ़ती उमस सभी को बेचैन कर देती है |

इस शहर की ख़ास इमारतों में सबसे पहला नाम जो ज़ेहन में आता है, वो है मेहरानगढ़ का किला | इसके अलावा देखने लायक इमारतों में उम्मेद भवन पैलेस, घंटा घर और जसवंत थाडा हैं | कुछ और जगहें भी हैं जैसे मंडोर बाग़, कायलाना झील, बालसमंद झील, रातानाडा गणेश मंदिर आदि |

मारवाड़ उत्सव या मांड उत्सव भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है | इसके अलावा बाबा रामदेव का मेला भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र है |

जोधपुर का हेंडीक्राफ्ट व्यवसाय भी काबिल-ए-तारीफ़ है | यहाँ के धातु के बर्तन, कांच की चूड़ियाँ, कालीन और मार्बल उद्योग अपनी अलग पहचान बना चुके हैं | जोधपुरी कोट की भी अलग ही शान है |

खान पान में जोधपुर पूरे राजस्थान में प्रसिद्द है | जोधपुर की नमकीन और मिठाई तो सभी की पसंद हैं | मिर्ची बड़ा, मावे की कचोरी, बेसन गट्टे, पचकूटा, कैर और गूँदे का अचार, लहसुन की चटनी, और गुलाबजामुन की सब्जी…. जितने नाम लिए जाएँ,कम हैं |

 

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