अंदाज़ अपना अपना- मौसम मन का

0
71

कभी गर्मी कभी सर्दी, कभी धूप कभी छाँव, कभी बारिश कभी पतझड़, इन मौसमों के चलते ख़याल आया कि क्या खुशियों का भी कोई मौसम होता है ? क्यों अचानक चलते चलते कदम रुक जाते हैं ? किस सोच में हाथ यूँ थम जाते हैं ? भूल जाते हैं हम कि हमारा वजूद भी हमसे कुछ कहता है | भूल जाते हैं कि एक दिन दुनिया थम जाएगी और सोचने का वक़्त भी नहीं रहेगा | अपने दिल के कोनों में झाँक कर देखो तो पता चलेगा कि कितना कुछ छूटा हुआ है, शायद यही खालीपन पैदा करता है और हम समझ नहीं पाते | आये दिन के शोर तो सहन करते हैं हम पर अपने अन्दर के उस शोर को अजनबी कर दिया है | जब यह सब हम पर हावी होने लगता है तो पता चलता है कि बहुत कुछ खो दिया हमने | सबसे पहले खुद को, फिर अपनों को…कोई नहीं आता साथ तो समझ में आता है कि किसी अपने को साथ रहने नहीं दिया हमने | मसरूफ़ियत ने सब रिश्ते नाते छीनकर तनहा कर दिया | क्या हो गया ए ज़िन्दगी, तू कल तक तो अपनी सी थी, आज अपनी होकर भी बेगानी लगती है ? किसी मौसम के आने जाने की आहट से अब फर्क ही नहीं पड़ता, मौसम पर मेरा हक़ भी कुछ नहीं | जिसपर हक़ है, वो मैं खुद हूँ, पर अब मैं खुद से भी जुदा हूँ | जब खुद से ही जुदा हो चलते हैं हम, तो फिर किसके होने से फ़र्क पड़ता है ? खुद के अंदाज़ बयां नहीं होते अब लफ़्ज़ों में, किसी और के जानने से क्या होगा ?
अकेले जब घूमने निकल पड़े कदम, तो साथी की तलाश के बारे में किसने सोचा ? अब लगता है, सोचते तो अच्छा था, न मिलता तो गम नहीं होता, मगर सोचा तो होता | अब जब अकेलेपन से दोस्ती करी तो अचानक मुड़कर क्यों देखा ? कोई किस्सा कभी था नहीं तो क्या याद आया ? शायद दिल का वही कोना कचोट रहा था जिसे तन्हाई की आदत से बाहर निकलने की एक अदद छुपी तमन्ना ने उकसाया था | चलो उकसाया तो सही, वर्ना पता नहीं चलता कि अब भी ज़िंदा हूँ मैं |
मेरे मन के मौसम में अनेकों पल ऐसे हैं जिन्हें जीया तो है मैंने किन्तु फिर भी जीवित महसूस नहीं किया | शायद यही हाल आज सबका है | बदलते मौसमों का अनुमान लग जाता है मगर अभ्यस्त होने में वक़्त लगता है | शायद दिल के मौसम में बहार का समय आने नहीं दिया हमने | दिमाग अब भी इसी उलझन में है कि क्या खुशियों का भी कोई मौसम होता है ? क्या इसके आने का अनुमान नहीं लगा सकते हम ? अगर होता तो कितना कुछ समेट लेते बाद में जीने के लिए | काश!!! तोहफे में मिल पाता ये खुशियों भरा मौसम तो हम देते भी और लेते भी …खुशी खुशी |

SHARE
Previous articleFolk Dances of Rajasthan
Next articleDon’t Blame

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here