Jaisalmer war museum

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राजस्थान का सबसे बड़ा जिला और समूचे देश में तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा है जैसलमेर | इस जिले से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा 464 किलोमीटर लम्बी है |

the_entrance_gate_from_nh-15_jaisalmer_war_museumथार रेगिस्तान-जहाँ के रेत के धोरे मन मोह लेते हैं और कई हिंदी फिल्मों की शूटिंग यहाँ हुई है |

wm4इसी जैसलमेर जिले में “जैसलमेर वॉर म्यूज़ियम” (JAISALMER WAR MUSEUM) है जिसके जनक हैं लेफ्टिनेंट जनरल बॉबी मैथ्यूज़ और इसका निर्माण इंडियन आर्मी की डेज़र्ट कोर ने किया | इस म्यूज़ियम को जैसलमेर में 24 August, 2015 में लेफ्टिनेंट जनरल अशोक सिंह (PVSM, AVSM, SM, VSM, ADC, General Officer Commanding-in-Chief, Southern Command, Indian Army) ने देश को समर्पित किया था | अपने किस्म के एकमात्र इस म्यूज़ियम में भारतीय फ़ौज के गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने लाया गया है | यहाँ पर 1965 और 1971 के युद्ध के समय जब्त किए गए दुशमन के हथियार और युद्ध सम्बंधित अन्य सामान को रखा गया है | एक दीवार पर HONOUR WALL के माध्यम से परमवीर चक्र और महावीर चक्र प्राप्त बहादुरों के नाम तराशे गए हैं | दो बड़े हॉल हैं – INDIAN ARMY HALL और LAUNGEWALA HALL , एक AUDIO-VISUAL ROOM और एक कैफेटेरिया भी है | हंटर जैसा लड़ाकू विमान, जिसने लोंगेवाला के युद्ध के समय पाकिस्तानी टैंक ध्वस्त कर दिए थे, भी यहाँ रखा हुआ है | पाकिस्तानी टैंक, जीप, कुछ अन्य मशीनें, बड़े ट्रक जिनमें दुशमनों का सामान ढोया जाता था और पाकिस्तानी सैनिक आते जाते थे, कई प्रकार की पुरानी मशीन गन, स्टेनगन, हथगोले, वायरलेस सेट, मोर्स कोड से सन्देश भेजने वाले यंत्र, रेडियो, खंजर, युद्ध  के समय काम में ली जाने वाली साइकिल, स्विस नाइफ जैसी कई चीज़ें यहाँ पर हैं | नक्शों द्वारा ये भी बताया गया है कि युद्ध के समय भारतीय सेना ने कौन कौन से मार्ग अपना कर दुश्मन को नाकों चने चबवा दिए थे | बहादुर शहीदों की तसवीरें देखकर रोम-रोम पुलकित हो उठता है |

commander-jaisalmer-southern-museum-command-inaugurated-general_b494e4ff-4bd0-11e5-a8da-005056b4648e“COUNTRY BEFORE SELF” का नारा ही हमारे भारतीय सैनिकों का एकमात्र उद्देश्य भी था | आपातकाल के समय और राष्ट्र निर्माण में फ़ौज के किरदार को दर्शाता इंडियन आर्मी हॉल बहादुरी की अनेकों दासतानें कहता है |

war-museumम्यूज़ियम देखने वालों के अनुभव को जानने के उद्देश्य से एक बोर्ड भी लगाया गया है जिसमें दर्शक अपने अनुभव पोस्ट-इट स्लिप्स द्वारा या फिर बोर्ड पर लिखकर बता सकते हैं |

जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर जैसलमेर शहर से लगभग 10 किलोमीटर पहले बने इस म्यूज़ियम के द्वारा उन सभी बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई है जिनके बिना भारत माता की बेड़ियाँ तोड़ना असंभव था |

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