इन्सानियत की जीती जागती परिभाषा है – श्री अशोक जैन - one2all
April 22, 2021
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इन्सानियत की जीती जागती परिभाषा है – श्री अशोक जैन

चाहे यह ग्रुप जो या शहर यह नाम लगभग सभी का जाना पहचाना है क्योंकि क्या बच्चे क्या बड़े लगभग हर कोई इनका मित्र है इन्हें जनता है और इनसे प्रेरणा लेते रहता है l जैन साहब पेशे से जीवन बीमा सलाहकार हैं साथ ही विषम परिस्थितिओं में लोन की आवश्यकता होने पर भी आप जैन साहब से संपर्क कर सकते हैं मेरा वादा है ये आपको निश्चित रूप से सही राह दिखाएँगे l

सेवानिवृति की उम्र में भी जो जोश जज़्बा और उमंग आप इनमे देख सकते हैं वो आप पूरे शहर में शायद ही तलाश कर पाएं l

चाहे किसी की मदद हो या पेड़ लगाना या रक्त की व्यवस्था जहाँ जहाँ इंसानियत की जरुरत है वहां सर बिना किसी निमंत्रण अपनी जिम्मेदारी समझ पहुँच जाते हैं वो भी इस युग में जहाँ लोग घर की घर में मदद नहीं करते पर अशोक जी ना नाम पूछते हैं ना कुछ और बस इन्हें पता लगना चाहिए और ये हाजिर हो जाते हैं l

जैन साहब के किस्से जब पता पडते हैं तो बस एक ही लाइन हर किसी के मुँह से निकलती है की कब मुझे भी इनके जैसी सोच और जीवन शैली मिले l व्यवस्थित दिनचर्या के साथ गज़ब की स्फूर्ति और जोश, लगभग हर रविवार 25 से 40 किलोमीटर साइकल चलाने का जोश पता नहीं कहाँ से आता हैं हम में से कई तो सोच कर ही थक जाते हैं की अपने बस की बात नहीं l

जैन साहब के बारे में ज्यादा लिखने से अच्छा हैं की आप इनसे जुड़ें और नित नई प्रेरणा ले लें

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