व्रत क्यों और कैसे? - one2all
October 19, 2020
Knowledge

व्रत क्यों और कैसे?

जैसा की हम सब जानते है की त्यौहार का मौसम चल रहा है और सभी लोग व्रत करते है ! अब सवाल ये उठता है की व्रत कैसे करे ? क्या सिर्फ भूखे पेट रहना ही व्रत है ? क्या शरीर को कष्ट देना व्रत है ?

आइये जानते है की मैं क्या सोचता हूँ व्रत के बारे में !

खाने पीने की चीज़ो से दूरी बनाना व्रत का नियम है जिसे सभी लोग जानते है और मानते है , पर क्या सिर्फ भोज्य पदार्थो से दूरी बना लेने से व्रत सफल हो जायेगा ?

व्रत का असल मतलब है संयम और नियंत्रण .

अब किस बात का संयम और किस पर नियंत्रण ?

सिर्फ शरीर को कष्ट देना और भूखे रहने से कभी व्रत सफल नहीं हो सकता . अगर सही अर्थ में व्रत करना है तो नीचे दिए बिन्दुओ पर गौर करे और उन को अनुसरण करने का प्रयास करे , जिस दिन आप इन सभी चीज़ो को करने में सफल होंगे तभी आप का व्रत सही मायने में सफल होगा .

१) भोज्य पदार्थो से दूरी बनाये पर सर्वथा भूखे न रहे इस तरह से आप अपने शरीर को कष्ट दे कर मानसिक संताप को निमंत्रण दे रहे है , भोजन न करे पर फल, जूस, शिकंजी इत्यादि का सेवन करे ताकि आपके पेट में अम्लीय तरल का उत्पादन न हो .

२) वाणी पर संयम बनाये रखे किसी पर क्रोध करना या अपशब्द कहना वैसे तो आम जीवन में भी नहीं करना चाहिए पर व्रत के दिन में इस बात का ख़ास ध्यान रखे की आप के शब्दों से किसी को भी ठेस न पहुंचे .

३) झूठ न बोले , जैसा की हम आम तौर पर करते है की छोटी छोटी बातो पर झूठ का सहारा ले कर टालमटोल करते है, तो वैसे तो झूठ को ज़िन्दगी में से ही निकाल बाहर करना चाहिए पर व्रत के दिन में इस बात का विशेष ध्यान रखे की मुँह से एक भी झूठ न निकले .

४) क्रोध न करे , छोटी छोटी बातो पर झल्लाना , चिड़चिड़ाना आज कल बहुत ही आम बात हो गयी है और हमने इसे आम जीवन का हिस्सा बना लिया है , इस आदत से बहार निकले और व्रत के दिन विशेष ध्यान रख कर अपने क्रोध पर नियंत्रण करे .

५) मन पर नियंत्रण , जैसा की हम सभी जानते है की हमारा मन एक बन्दर की तरह है , हमेशा उछलता कूदता रहता है कभी इस पेड़ पर कभी उस शाख पर , तो इस प्रवृत्ति पर रोक लगाना भी एक सफल व्रत के लिए उत्तम मंत्र है .

६) व्रत के दिन किसी की भूख प्यास ख़तम करने का साधन बने , चाहे वो मनुष्य हो अथवा पशु पक्षी या पेड़ पौधे हो.

७) व्रत के दिन भूल से भी किसी को पीड़ा / कष्ट न पहुचाये चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक , अपना कार्य स्व्यं करे और दूसरो को भी इस के लिए प्रेरित करे .

८) अच्छे और धार्मिक साहित्य का अध्यन करे .

अगर आप ने ऊपर दिए कार्य व्रत के दिन करने शुरू कर दिए तो मैं आप को यकीन दिला कर बोलता हु की कुछ ही व्रत के बाद आप इन सभी चीज़ो का महत्व समझने लगेंगे और कुछ ही समय में ये सभी सद्कार्य आप की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन जायेंगे और आप के आस पास के लोग परिवार और समाज में आप एक प्रियजन बन जायेंगे जिन के बिना किसी भी आयोजन को सिद्ध करना मुश्किल होगा .मुझे ज्ञात है की मैंने जो विधि बताई है वो आप को कोई और नहीं बताएगा और इस में कई लोग विरोध भी कर सकते है पर आप भी कर के देखिये वास्तव में फर्क दिखेगा.

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